CJP को मनाने में जुटी सरकार, दिल्ली से 2000 KM दूर पुडुचेरी तक पहुंचा प्रतिनिधिमंडल; क्या ब्रिक्स सम्मेलन की भी चिंता?

नई दिल्ली: 5 सितंबर को दिल्ली में फिर आंदोलन का ऐलान कर चुकी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को मनाने के लिए सरकार की कोशिशें तेज हो गई हैं। जंतर-मंतर पर एक महीने तक चले आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग मनवाने वाली सीजेपी ने अब इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। इसी बीच सरकार का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल सीजेपी नेताओं से बातचीत के लिए दिल्ली से करीब 2000 किलोमीटर दूर पुडुचेरी तक पहुंच गया। सीजेपी के सह संयोजक सौरभ दास ने बताया कि पुडुचेरी में उनसे तीन बार मुलाकात कर लंबित मांगों पर बातचीत की गई है।

सीजेपी का नया आंदोलन ऐसे समय प्रस्तावित है, जब दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियां भी चल रही हैं। सम्मेलन में रूस, चीन समेत करीब 20 देशों के प्रतिनिधियों और राष्ट्राध्यक्षों के दिल्ली पहुंचने की संभावना है। ऐसे में सरकार नहीं चाहती कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान राजधानी की सड़कों पर किसी तरह का आंदोलन या अशांति नजर आए। यही वजह मानी जा रही है कि सरकार सीजेपी के साथ बातचीत के जरिए विवाद को जल्द सुलझाने की कोशिश कर रही है।

दो प्रमुख मांगों पर सरकार से चल रही बातचीत

सौरभ दास के मुताबिक, सरकार की ओर से गठित उच्च स्तरीय समिति लगातार सीजेपी के संपर्क में है। उन्होंने बताया कि जब वह पुडुचेरी स्थित अपने घर चले गए थे, तब भी समिति वहां पहुंची और तीन बार मुलाकात हुई। इन बैठकों में आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने और मुआवजे की मांग को लेकर चर्चा हुई।

दास ने केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए हालिया कदमों को सकारात्मक बताया है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि सरकार और सीजेपी के बीच संभावित समझौते की रूपरेखा पर बातचीत आगे बढ़ चुकी है। अब सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

एफआईआर के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार

सीजेपी ने जंतर-मंतर पर चले आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की थी। इसके अलावा नीट पीजी प्रश्नपत्र लीक के कारण आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी रखी गई थी। बताया गया कि सरकार इन मांगों को सैद्धांतिक तौर पर स्वीकार कर चुकी है, लेकिन औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।

इसी बीच आंदोलन से जुड़ी प्राथमिकी का मामला सर्वोच्च अदालत में चल रही कुछ सुनवाइयों के कारण लंबित था। अब सरकार और दिल्ली पुलिस ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर इस मामले के जल्द निपटारे की दिशा में कदम बढ़ाया है। इससे सीजेपी की एक प्रमुख मांग पूरी होने का रास्ता साफ हो सकता है।

क्या सीजेपी के दबाव में फिर झुकी सरकार?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सीजेपी एक बार फिर सरकार पर दबाव बनाने में सफल रही है? पहले जंतर-मंतर पर लंबे आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पूरी होने के बाद अब मुकदमे वापस लेने और मुआवजे की मांग को लेकर सरकार के स्तर पर बातचीत आगे बढ़ी है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन ने सरकार की चिंता बढ़ाई है। सितंबर की शुरुआत में राजधानी में बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियां अपने चरम पर होंगी। ऐसे में सरकार किसी नए आंदोलन से पैदा होने वाली असहज स्थिति से बचना चाहती है।

5 सितंबर के प्रदर्शन पर टिकी नजर

माना जा रहा है कि यदि सीजेपी से जुड़े मामलों में प्राथमिकी वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है और मुआवजे पर भी सरकार जल्द औपचारिक घोषणा करती है, तो केंद्र सीजेपी से 5 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को वापस लेने की अपील कर सकता है। फिलहाल सरकार और सीजेपी के बीच बातचीत जारी है और आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंचते हैं या राजधानी में आंदोलन का नया दौर शुरू होता है।

 

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